वॉरसा में अमरीका की मेज़बानी में होने जा रहा मध्य-पूर्व सम्मलेन एक दिलचस्प कूटनीतिक आयोजन हो सकता है.
लेकिन पश्चिमी देशों और अरब देशों का ये सम्मेलन पोलैंड की राजधानी में क्यों हो रहा है? इसका सह-आयोजक पोलैंड मध्य-पूर्व की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए नहीं जाना जाता है.
लेकिन पोलैंड नेटो का एक सक्रिय सदस्य है और रूस के साथ उसका मुश्किल इतिहास उसे अमरीका की ओर झुकने की अच्छी वजह देता है.
पोलैंड में अमरीका का एंटी-बैलिस्टिक मिसाइल ठिकाना भी हैं. पोलैंड के बहुत से नागरिक अपने देश में अमरीका का सैन्य अड्डा भी चाहते हैं.
कुछ लोगों ने इसे फ़ोर्ट ट्रंप का नाम भी दिया है. ऐसे में अमरीकी कूटनीतिक सम्मेलन का आयोजन करना उन्हें अपने हित की बात लगती है.
लेकिन इस सम्मेलन के पोलैंड में होने की एक और वजह ये है कि यूरोप में अमरीका के अन्य दोस्त देश इसकी मेज़बानी के लिए बहुत उत्साहित नहीं थे.
यूरोपीय कूटनीतिक गलियारे में इसे लेकर एक साझा असहजता भी दिख रही है. सम्मेलन क़रीब है और अभी ये स्पष्ट नहीं है कि कौन-कौन इसमें शामिल होगा और किस स्तर का प्रतिनिधित्व रहेगा.
इसलिए अब सम्मेलन के एजेंडे को और व्यापक करते हुए "मध्य पूर्व में सुरक्षित और शांतिपूर्ण भविष्य को बढ़ावा देना" कर दिया गया है.
एजेंडे में अब ईरान का नाम नहीं है जबकि मानवीय और शरणार्थी संकट, मिसाइल प्रसार और 21वीं सदी में आतंकवाद और साइबर हमलों की चुनौतियों इसमें शामिल हैं.
इसराइल-फ़लस्तीनी विवाद भी एजेंडे में शामिल नहीं है. फ़लस्तीनी इस सम्मेलन में हिस्सा नहीं ले रहे हैं क्योंकि उन्होंने ट्रंप प्रशासन का बहिष्कार किया हुआ है.
कौन हिस्सा ले रहा है और क्यो?
इस सम्मेलन में कौन-कौन शामिल हो रहा है ये तब तक नहीं पता चलेगा जब तक मंत्री और अधिकारी वास्तव में यहां नहीं पहुंचेंगे.
अमरीका का प्रतिनिधित्व विदेश मंत्री माइक पॉम्पियो करेंगे लेकिन माना जा रहा है कि उपराष्ट्रपति माइक पेंस और ट्रंप के दामाद जेरेड कशनर भी इसमें हिस्सा ले सकते हैं.
कशनर को ही मध्य पूर्व में अमरीकी शांति योजना का आर्किटेक्ट माना जा रहा है.
ब्रितानी विदेश मंत्री जेरेमी हंट कम से कम उद्घाटन सत्र में मौजूद रहेंगे.
वहीं यूरोप के अन्य बड़े देशों की भी इसमें प्रतिनिधित्व होगा लेकिन वो निचले स्तर के अधिकारियों को ही भेज सकते हैं.
पोलैंड से जुड़े सूत्रों के मुताबिक़ इसराइली प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू वॉरसा आ रहे हैं. कई अरब देश अपने मंत्रियों के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल भेज रहे हैं जिनमें सऊदी अरब, यमन, जॉर्डन, कुवैत, बहरीन, मोरक्को, ओमान, संयुक्त अरब अमीरात, मिस्र और ट्यूनीशिया शामिल हैं.
1990 के दशक में मैड्रिड में हुए सम्मेलन के बाद ये पहली बार होगा जब इसराइल और उदारवादी अरब देश शांति वार्ता में हिस्सा लेंगे. शांति के कई पहलुओं पर बात होगी लेकिन चर्चा का अहम मुद्दा ईरान ही रह सकता है.
सम्मेलन में हिस्सा ले रहे देशों में ईरान को लेकर मतभेद भी हैं. अमरीका, इसराइल और कई उदारवादी अरब देश क्षेत्र में ईरान के बढ़ते प्रभाव को लेकर चिंतित हैं जो मानते हैं कि ईरान हर मौक़े का इस्तेमाल अपने प्रभाव को बढ़ाने के लिए कर रहा है.
ये देश 2015 में ईरान की परमाणु गतिविधियों को सीमित करने के लिए हुए समझौते को लेकर भी आशंकित थे.
ख़ासतौर पर इसराइल इस मुद्दे पर सऊदी अरब और अमरीका के साथ खड़ा है.
सीरिया और लेबनान में बढ़ते ईरानी सैन्य दख़ल का सामना इसराइल कर रहा है. इस क्षेत्र में वो ईरान समर्थिक मिलिशिया और ईरानी बलों के ख़िलाफ़ संघर्ष कर रहा है.
नेतन्याहू ये तर्क दे सकते हैं कि ईरान को परमाणु समझौते को लेकर अमरीका और यूरोपीय देशों में हुए मतभेद के नज़रिए से न देखा जाए.
वो तर्क दे सकते हैं कि इस मुद्दे पर यूरोपीय मूल्य ही दांव पर हैं. ईरान का व्यवहार, आतंकवाद को उसका समर्थन, मानवाधिकार उल्लंघन और विदेशी नागरिकों को हिरासत में रखना ऐसे मुद्दे हैं जिन पर यूरोपीय देशों को चिंतित होना चाहिए.
ये सच है कि लंदन, पेरिस और बर्लिन में विदेश मंत्री ईरान के क्षेत्रीय प्रभाव और उसके मिसाइल कार्यक्रम को लेकर चिंतित हैं. लेकिन इसे लेकर क्या किया जाए इस पर अनिश्चितता है.
यूरोपीय देशों के लिए ईरान के परमाणु कार्यक्रम को रोके रखने के लिए परमाणु समझौते को बनाए रखना सबसे बड़ी चिंता है. लेकिन अमरीका, इसराइल और अरब देशों के लिए ये अपर्याप्त है.
लेकिन इस समय ब्रेक्ज़िट और कई अन्य मुद्दों को लेकर भी यूरोप का ध्यान बंटा हुआ है. ट्रंप प्रशासन के साथ लगातार टकराव और अमरीकी राष्ट्रपति के अनिश्चित नीतिगत निर्णय- जैसे की सीरिया से अमरीकी बलों को वापस बुलाना और अफ़ग़ानिस्तान से सैन्य बल बुलाने का फ़ैसला करना- जैसे निर्णयों ने हालात और बदतर किए हैं.
ईरान परमाणु समझौते से अमरीका का अलग होना और हाल ही में आईएनएफ़ निरस्त्रीकरण संधि से अलग होने से अमरीका पर यूरोप का लगातार कम हो रहा भरोसा और कमज़ोर होता है.
ऐसे में मध्य पूर्व में भले ही कितनी समस्याएं हों, ये सम्मेलन में हमें पश्चिमी खेमों में बढ़ रहे मतभेद के बारे में अधिक बतायएगा, जो हर दिन के साथ बेहतर होने के बजाए और बदतर होते जा रहे हैं.
Wednesday, February 13, 2019
Wednesday, February 6, 2019
मलका पुखराज... वो बातें तेरी वो फ़साने तेरेः विवेचना
हफ़ीज़ जालंधरी की नज़्म अभी तो मैं जवान हूँ को पूरी दुनिया में मशहूर करने का श्रेय अगर किसी को दिया जा सकता है, तो वो हैं मलका पुखराज.
कश्मीर के महाराजा हरि सिंह के दरबार से अपने करियर की शुरुआत करने वाली मलका ग़ज़ल गायकी के उस मुक़ाम तक पहुंची, जहाँ अब तक बहुत कम लोग पहुंच पाए हैं.
उनकी मौत से एक साल पहले अंग्रेज़ी में उनकी आत्मकथा प्रकाशित हुई थी, ' सॉन्ग संग ट्रू.' दिलचस्प बात ये है कि उसको उनके देश पाकिस्तान में नहीं, बल्कि भारत में छपवाया गया था और उसको छपवाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी मलका को नज़दीक से जानने वाले पाकिस्तान के जाने-माने राजनीतिज्ञ और वकील रज़ा काज़िम ने.
रज़ा काज़िम बताते हैं, ''मलका पुखराज से मेरी वाकफ़ियत हो गई थी. वो आती-जाती थीं मेरे पास. मैं उनका क़दरदान था, एक फ़नकार की हैसियत से और वो मुझ पर ऐतबार करती थीं. जब उन्होंने अपने हाथ से लिखा मसौदा मुझे दिया तो मैंने उसे पूरा पढ़ा. मैंने उनसे कहा कि मैं इसे दिल्ली में जा कर छपवाउँगा, क्योंकि उसका पाकिस्तान में छपना मुश्किल था.''
उन्होंने बताया, ''उनके दामाद जो यहां वकील थे, वो उसके छपने की सख़्त मुख़ालफ़त कर रहे थे. उसमें उन्होंने अपने रिश्तेदारों के ख़िलाफ़ काफ़ी कुछ लिखा था मैंने जब उनसे उसे छपवाने की इजाज़त माँगी तो उन्होंने वो मसौदा मुझे पकड़ा दिया और कहा तुम इसका जो चाहो कर सकते हो. सलीम क़िदवई मेरे जानने वाले थे और अजीज़ दोस्त भी थे. मैंने उनसे उसे भारत में छपवाने के लिए कहा तो वो इसके लिए फ़ौरन राज़ी हो गए.''
जब सलीम किदवई को उनकी उर्दू में लिखी आत्मकथा का अंग्रेज़ी में अनुवाद करने की ज़िम्मेदारी दी गई तो उन्होंने तय किया कि इससे पहले कि वो अपने काम की शुरुआत करें, वो मलका से मिलने लाहौर जाएंगे.
सलीम बताते हैं, ''बहुत ही प्रभावशाली शख़्सियत थी उनकी, हाँलाकि उनकी उम्र हो गई थी. हमेशा 'वेल टर्न्ड आउट' रहती थीं और ऐसा लगता था कि वो हमेशा ऐसी ही रहीं होंगी. उनको हमेशा से अच्छे कपड़े और ज़ेवर पहनने का शौक था. आख़िर तक उनका ये शौक बरकरार रहा. जूते ज़रूर वो 'स्नीकर्स' पहनती थीं, ताकि उन्हें चलने में दिक्कत न हो.''
वह कहते हैं, ''शुरू में न मैं उन्हें जानता था और न ही वो मुझे जानती थीं. थोड़ी 'ऑक्वर्डनेस' थी हम दोनों के बीच लेकिन बहुत जल्दी वो ख़त्म हो गई. वो बहुत सी ऐसी बातें करती थीं, जो उस किताब में दर्ज नहीं थीं. जब मैंने एक दफ़ा उनसे कहा कि इन्हें किताब में होना चाहिए तो उन्होंने कहा नहीं, जो मैंने लिखना था वो लिख दिया है. अब और कुछ उस किताब में नहीं जाएगा.''
चिकन का मुकैश से कढ़े कपड़े का तोहफ़ा
जब सलीम क़िदवई लाहौर गए तो वो उनके लिए लखनऊ की सेवा दुकान से चिकन का मुकैश से कढ़ा कपड़ा ले गए, लेकिन वो मलका पुखराज को पसंद नहीं आया. कहने लगीं कि इससे उनकी खाल छिल जाएगी.
सलीम क़िदवई याद करते हैं, ''उन्होंने कहा कि ये हैं तो बहुत ख़ूबसूरत, लेकिन ये गड़ेगा मेरी खाल को. अबकी आना तो बिना मुकैश की कढ़ाई वाला कपड़ा लाना. फिर उन्होंने बताया कि उन्हें कौन से रंग पसंद हैं.''
बाबा नानकदेव की तस्वीर काढ़ी थी मलका पुखराज ने
मलका पुखराज की पोती फ़राज़े सैयद, जिन्हें उन्होंने गोद भी ले लिया था, बताती हैं कि उनके अंतर्मन और हाथों के बीच ग़ज़ब का सामंजस्य था.
फ़राज़े कहती हैं, ''उनका 'हैंड-राइटिंग' पर बहुत 'फ़ोकस' था और लोग मिसाल दिया करते थे कि ऐसी होनी चाहिए 'हैंड- राइटिंग.' मुझे भी वो बचपन में तख़्ती पर लिखवाया करती थीं, कलम के साथ ताकि मेरी 'राइटिंग' भी अच्छी हो जाए. लेकिन मेरी 'राइटिंग' उतनी अच्छी नहीं हो पाई. इसकी वजह से मुझे उनसे बहुत मार भी पड़ी.''
वह कहती हैं, ''वो बहुत दिल लगाकर कढ़ाई करती थीं. उनकी कढ़ाई के कपड़ों की बहुत सी 'एक्ज़ीबीशन्स' भी हुईं. उनके एक दोस्त जो टोरंटो में रहते थे और सिख थे, उनके लिए उन्होंने बाबा नानक की तस्वीर काढ़ कर उन्हें भिजवाई थी. इसके अलावा उन्हें बागबानी का भी बहुत शौक था. दिन में वो तीन-तीन, चार-चार घंटे 'गार्डनिंग' किया करती थीं.''
फ़राज़े बताती हैं, ''उन्हें खाना बनाने का भी बहुत शौक था और वो बेहतरीन खाना बनाती थीं. पूरा-पूरा दिन लगता था उनको एक हांडी बनाने में. मैं अक्सर उनसे सेब- गोश्त बनाने की फ़रमाइश करती थी. ये उनकी कश्मीर की एक 'डिश' थी. वो ख़ास सेब मंगवाती थीं एक ख़ास जगह से और फिर उन्हें सुखा कर रख देती थीं. मौसमी सब्ज़ियों को भी वो सुखा कर रखती थीं. सारा साल हमारे घर के पीछे अचार डल रहे होते थे. ये सारा काम वो खुद करती थीं. उनकी हांडी में अगर कोई चम्मच भी हिला दे, तो उनके लिए ये बहुत बड़ा मुद्दा बन जाता था.''
अपनी गाड़ी ठीक करवाने खुद जाती थीं मलका
उनमें ऊर्जा इतनी थी कि वो जून की तपती धूप में भी अपनी गाड़ी ठीक करवाने खुद जाती थीं.
फ़राज़े याद करती हैं, ''वो 'ट्रस्ट' नहीं करती थीं कि कोई उनकी गाड़ी ठीक करवा दे. दूध भी लेना हो तो वो अपने ड्राइवर के साथ बाज़ार जाती थीं, क्योंकि वो अपनी गाड़ी किसी को नहीं देना चाहती थीं. वो गाड़ी से उतर कर घंटों 'मेकैनिक' के सिर पर खड़ी रहतीं और कहा करती थीं, 'तू ऐ नहीं ठीक कीता, तू ओ नहीं ठीक कीता. तू गड्डी ठीक नहीं कीता सही तरह से'.''
कश्मीर के महाराजा हरि सिंह के दरबार से अपने करियर की शुरुआत करने वाली मलका ग़ज़ल गायकी के उस मुक़ाम तक पहुंची, जहाँ अब तक बहुत कम लोग पहुंच पाए हैं.
उनकी मौत से एक साल पहले अंग्रेज़ी में उनकी आत्मकथा प्रकाशित हुई थी, ' सॉन्ग संग ट्रू.' दिलचस्प बात ये है कि उसको उनके देश पाकिस्तान में नहीं, बल्कि भारत में छपवाया गया था और उसको छपवाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी मलका को नज़दीक से जानने वाले पाकिस्तान के जाने-माने राजनीतिज्ञ और वकील रज़ा काज़िम ने.
रज़ा काज़िम बताते हैं, ''मलका पुखराज से मेरी वाकफ़ियत हो गई थी. वो आती-जाती थीं मेरे पास. मैं उनका क़दरदान था, एक फ़नकार की हैसियत से और वो मुझ पर ऐतबार करती थीं. जब उन्होंने अपने हाथ से लिखा मसौदा मुझे दिया तो मैंने उसे पूरा पढ़ा. मैंने उनसे कहा कि मैं इसे दिल्ली में जा कर छपवाउँगा, क्योंकि उसका पाकिस्तान में छपना मुश्किल था.''
उन्होंने बताया, ''उनके दामाद जो यहां वकील थे, वो उसके छपने की सख़्त मुख़ालफ़त कर रहे थे. उसमें उन्होंने अपने रिश्तेदारों के ख़िलाफ़ काफ़ी कुछ लिखा था मैंने जब उनसे उसे छपवाने की इजाज़त माँगी तो उन्होंने वो मसौदा मुझे पकड़ा दिया और कहा तुम इसका जो चाहो कर सकते हो. सलीम क़िदवई मेरे जानने वाले थे और अजीज़ दोस्त भी थे. मैंने उनसे उसे भारत में छपवाने के लिए कहा तो वो इसके लिए फ़ौरन राज़ी हो गए.''
जब सलीम किदवई को उनकी उर्दू में लिखी आत्मकथा का अंग्रेज़ी में अनुवाद करने की ज़िम्मेदारी दी गई तो उन्होंने तय किया कि इससे पहले कि वो अपने काम की शुरुआत करें, वो मलका से मिलने लाहौर जाएंगे.
सलीम बताते हैं, ''बहुत ही प्रभावशाली शख़्सियत थी उनकी, हाँलाकि उनकी उम्र हो गई थी. हमेशा 'वेल टर्न्ड आउट' रहती थीं और ऐसा लगता था कि वो हमेशा ऐसी ही रहीं होंगी. उनको हमेशा से अच्छे कपड़े और ज़ेवर पहनने का शौक था. आख़िर तक उनका ये शौक बरकरार रहा. जूते ज़रूर वो 'स्नीकर्स' पहनती थीं, ताकि उन्हें चलने में दिक्कत न हो.''
वह कहते हैं, ''शुरू में न मैं उन्हें जानता था और न ही वो मुझे जानती थीं. थोड़ी 'ऑक्वर्डनेस' थी हम दोनों के बीच लेकिन बहुत जल्दी वो ख़त्म हो गई. वो बहुत सी ऐसी बातें करती थीं, जो उस किताब में दर्ज नहीं थीं. जब मैंने एक दफ़ा उनसे कहा कि इन्हें किताब में होना चाहिए तो उन्होंने कहा नहीं, जो मैंने लिखना था वो लिख दिया है. अब और कुछ उस किताब में नहीं जाएगा.''
चिकन का मुकैश से कढ़े कपड़े का तोहफ़ा
जब सलीम क़िदवई लाहौर गए तो वो उनके लिए लखनऊ की सेवा दुकान से चिकन का मुकैश से कढ़ा कपड़ा ले गए, लेकिन वो मलका पुखराज को पसंद नहीं आया. कहने लगीं कि इससे उनकी खाल छिल जाएगी.
सलीम क़िदवई याद करते हैं, ''उन्होंने कहा कि ये हैं तो बहुत ख़ूबसूरत, लेकिन ये गड़ेगा मेरी खाल को. अबकी आना तो बिना मुकैश की कढ़ाई वाला कपड़ा लाना. फिर उन्होंने बताया कि उन्हें कौन से रंग पसंद हैं.''
बाबा नानकदेव की तस्वीर काढ़ी थी मलका पुखराज ने
मलका पुखराज की पोती फ़राज़े सैयद, जिन्हें उन्होंने गोद भी ले लिया था, बताती हैं कि उनके अंतर्मन और हाथों के बीच ग़ज़ब का सामंजस्य था.
फ़राज़े कहती हैं, ''उनका 'हैंड-राइटिंग' पर बहुत 'फ़ोकस' था और लोग मिसाल दिया करते थे कि ऐसी होनी चाहिए 'हैंड- राइटिंग.' मुझे भी वो बचपन में तख़्ती पर लिखवाया करती थीं, कलम के साथ ताकि मेरी 'राइटिंग' भी अच्छी हो जाए. लेकिन मेरी 'राइटिंग' उतनी अच्छी नहीं हो पाई. इसकी वजह से मुझे उनसे बहुत मार भी पड़ी.''
वह कहती हैं, ''वो बहुत दिल लगाकर कढ़ाई करती थीं. उनकी कढ़ाई के कपड़ों की बहुत सी 'एक्ज़ीबीशन्स' भी हुईं. उनके एक दोस्त जो टोरंटो में रहते थे और सिख थे, उनके लिए उन्होंने बाबा नानक की तस्वीर काढ़ कर उन्हें भिजवाई थी. इसके अलावा उन्हें बागबानी का भी बहुत शौक था. दिन में वो तीन-तीन, चार-चार घंटे 'गार्डनिंग' किया करती थीं.''
फ़राज़े बताती हैं, ''उन्हें खाना बनाने का भी बहुत शौक था और वो बेहतरीन खाना बनाती थीं. पूरा-पूरा दिन लगता था उनको एक हांडी बनाने में. मैं अक्सर उनसे सेब- गोश्त बनाने की फ़रमाइश करती थी. ये उनकी कश्मीर की एक 'डिश' थी. वो ख़ास सेब मंगवाती थीं एक ख़ास जगह से और फिर उन्हें सुखा कर रख देती थीं. मौसमी सब्ज़ियों को भी वो सुखा कर रखती थीं. सारा साल हमारे घर के पीछे अचार डल रहे होते थे. ये सारा काम वो खुद करती थीं. उनकी हांडी में अगर कोई चम्मच भी हिला दे, तो उनके लिए ये बहुत बड़ा मुद्दा बन जाता था.''
अपनी गाड़ी ठीक करवाने खुद जाती थीं मलका
उनमें ऊर्जा इतनी थी कि वो जून की तपती धूप में भी अपनी गाड़ी ठीक करवाने खुद जाती थीं.
फ़राज़े याद करती हैं, ''वो 'ट्रस्ट' नहीं करती थीं कि कोई उनकी गाड़ी ठीक करवा दे. दूध भी लेना हो तो वो अपने ड्राइवर के साथ बाज़ार जाती थीं, क्योंकि वो अपनी गाड़ी किसी को नहीं देना चाहती थीं. वो गाड़ी से उतर कर घंटों 'मेकैनिक' के सिर पर खड़ी रहतीं और कहा करती थीं, 'तू ऐ नहीं ठीक कीता, तू ओ नहीं ठीक कीता. तू गड्डी ठीक नहीं कीता सही तरह से'.''
Monday, February 4, 2019
जब लोकसभा में लगे नारे, ‘CBI तोता है, तोता है..तोता है’
लोकसभा चुनाव से पहले पश्चिम बंगाल राजनीति का अखाड़ा बनता जा रहा है. बहुचर्चित शारदा चिटफंड घोटाले में कार्रवाई को लेकर केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) और पश्चिम बंगाल सरकार आमने-सामने है. सीबीआई विवाद का मुद्दा सोमवार को देश की संसद में भी गूंजा. जिस दौरान लोकसभा में गृहमंत्री राजनाथ सिंह सीबीआई विवाद पर जवाब दे रहे थे, तब विपक्ष ने जमकर हंगामा किया. इस दौरान तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सांसद सदन में नारे लगा रहे थे, ‘CBI तोता है, तोता है..तोता है’.
दरअसल, सोमवार को जैसे ही लोकसभा की कार्यवाही शुरू हुई तो विपक्षी पार्टियों ने पश्चिम बंगाल का मुद्दा उठाया और मोदी सरकार पर सीबीआई का दुरुपयोग करने का आरोप लगाया. कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों ने जब केंद्र पर आरोप लगाए, तो गृह मंत्री राजनाथ सिंह सरकार की ओर से जवाब देने को खड़े हुए.
गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि सीबीआई के अधिकारियों को कोलकाता पुलिस द्वारा जांच करने से रोका गया. सीबीआई को शारदा स्कैम की जांच करने की जिम्मेदारी सुप्रीम कोर्ट ने दी है. सीबीआई अधिकारियों को काम करने से रोका गया है, ऐसी घटना पहले कभी नहीं हुई.
राजनाथ ने कहा कि देश की कानूनी एजेंसियों के बीच ऐसा टकराव देश के फेडरल और राजनीतिक ढांचे के लिए ठीक नहीं है. उन्होंने कहा कि एजेंसियों को अगर काम करने से रोका जाएगा तो इससे अव्यवस्था पैदा होगी.
विपक्ष ने मोदी सरकार को घेरा
लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों में ही सीबीआई विवाद के कारण हंगामा हुआ. लोकसभा में कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि केंद्र सरकार CBI को हथियार बना सभी विपक्षी नेताओं को खत्म करना चाहती है.
उन्होंने कहा कि जो भी अन्याय के खिलाफ आवाज उठाता है, उसे दबाने की कोशिश हो रही है. BJO अपनी शक्ति बढ़ाने के लिए CBI का दुरुपयोग कर रही है. मल्लिकार्जुन खड़गे के अलावा समाजवादी पार्टी नेता धर्मेंद्र यादव, TMC सांसद सौगत राय ने भी मोदी सरकार पर निशाना साधा.
सेना ने तत्काल मदद से किया था इंकार
गुप्ता ने सदन को बताया था कि दानापुर के इंचार्ज सेना अफसर ने इस 'अनुरोध' के बारे में अपने वरिष्ठ अधिकारियों को बताया था. अफसर ने इस लेटर के जवाब में लिखा था, 'सेना सिर्फ अधिकृत सिविल अथॉरिटीज के अनुरोध पर ही नागरिक प्रशासन में किसी तरह की मदद करता है. इस बारे में सेना मुख्यालय से मार्गदर्शन का इंतजार है.' तो एक तरह से सेना ने मदद से इंकार कर दिया, जिसके बाद सीबीआई ने कोर्ट की शरण ली. कोर्ट ने असहयोग के लिए बिहार के डीजीपी को कारण बताओ नोटिस जारी किया.
इस पार्टी में शामिल हो गए सीबीआई अफसर
तब लालू को गिरफ्तार करने की हिम्मत दिखाने वाले अफसर यू.एन. बिस्वास की ईमानदारी के लिए काफी तारीफ भी हुई थी. लेकिन इस कहानी में एक और ट्विस्ट है. बाद में यह अफसर राजनीति में चले गए और आप यह जानकर चौंक जाएंगे कि वह किस पार्टी में गए- तृणमूल कांग्रेस. जी हां, ममता बनर्जी ने उन्हें अपनी सरकार में पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग का मंत्री बनाया.
दरअसल, सोमवार को जैसे ही लोकसभा की कार्यवाही शुरू हुई तो विपक्षी पार्टियों ने पश्चिम बंगाल का मुद्दा उठाया और मोदी सरकार पर सीबीआई का दुरुपयोग करने का आरोप लगाया. कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों ने जब केंद्र पर आरोप लगाए, तो गृह मंत्री राजनाथ सिंह सरकार की ओर से जवाब देने को खड़े हुए.
गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि सीबीआई के अधिकारियों को कोलकाता पुलिस द्वारा जांच करने से रोका गया. सीबीआई को शारदा स्कैम की जांच करने की जिम्मेदारी सुप्रीम कोर्ट ने दी है. सीबीआई अधिकारियों को काम करने से रोका गया है, ऐसी घटना पहले कभी नहीं हुई.
राजनाथ ने कहा कि देश की कानूनी एजेंसियों के बीच ऐसा टकराव देश के फेडरल और राजनीतिक ढांचे के लिए ठीक नहीं है. उन्होंने कहा कि एजेंसियों को अगर काम करने से रोका जाएगा तो इससे अव्यवस्था पैदा होगी.
विपक्ष ने मोदी सरकार को घेरा
लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों में ही सीबीआई विवाद के कारण हंगामा हुआ. लोकसभा में कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि केंद्र सरकार CBI को हथियार बना सभी विपक्षी नेताओं को खत्म करना चाहती है.
उन्होंने कहा कि जो भी अन्याय के खिलाफ आवाज उठाता है, उसे दबाने की कोशिश हो रही है. BJO अपनी शक्ति बढ़ाने के लिए CBI का दुरुपयोग कर रही है. मल्लिकार्जुन खड़गे के अलावा समाजवादी पार्टी नेता धर्मेंद्र यादव, TMC सांसद सौगत राय ने भी मोदी सरकार पर निशाना साधा.
सेना ने तत्काल मदद से किया था इंकार
गुप्ता ने सदन को बताया था कि दानापुर के इंचार्ज सेना अफसर ने इस 'अनुरोध' के बारे में अपने वरिष्ठ अधिकारियों को बताया था. अफसर ने इस लेटर के जवाब में लिखा था, 'सेना सिर्फ अधिकृत सिविल अथॉरिटीज के अनुरोध पर ही नागरिक प्रशासन में किसी तरह की मदद करता है. इस बारे में सेना मुख्यालय से मार्गदर्शन का इंतजार है.' तो एक तरह से सेना ने मदद से इंकार कर दिया, जिसके बाद सीबीआई ने कोर्ट की शरण ली. कोर्ट ने असहयोग के लिए बिहार के डीजीपी को कारण बताओ नोटिस जारी किया.
इस पार्टी में शामिल हो गए सीबीआई अफसर
तब लालू को गिरफ्तार करने की हिम्मत दिखाने वाले अफसर यू.एन. बिस्वास की ईमानदारी के लिए काफी तारीफ भी हुई थी. लेकिन इस कहानी में एक और ट्विस्ट है. बाद में यह अफसर राजनीति में चले गए और आप यह जानकर चौंक जाएंगे कि वह किस पार्टी में गए- तृणमूल कांग्रेस. जी हां, ममता बनर्जी ने उन्हें अपनी सरकार में पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग का मंत्री बनाया.
Friday, February 1, 2019
सिटी ऑफ लाइट घोड़े ने जीती 120 करोड़ रुपए प्राइज मनी वाली रेस
अमेरिका के जॉकी जेवियर ने अपने घोड़े सिटी अाॅफ लाइट के साथ पेगासस हॉर्स रेस वर्ल्ड कप की डर्ट रेस जीत ली। उन्होंने 1.81 किमी की यह रेस एक मिनट 47 सेकंड में पूरी की। गल्फस्ट्रीम पार्क रेस कोर्स पर सिटी ऑफ लाइट ने शुरुआत से ही बढ़त बना ली थी। ब्रीडर्स कप क्लासिक रेस जीतने वाले घोड़े एक्सलरेट ने उसे पीछे छोड़ने की कोशिश की, पर कामयाब नहीं हुआ। बारिश के कारण ट्रैक काफी चिकना हो गया था, लेकिन इससे सिटी आॅफ लाइट की स्पीड कम नहीं हुई।
टर्फ और डर्ट पर अलग-अलग रेस
यह इस घोड़े के करिअर की आखिरी रेस थी। जेवियर और सिटी ऑफ लाइट पहली बार यहां चैंपियन बने। यह जेवियर के करिअर की 48वीं जीत है। विजेता को 21 करोड़ रुपए की प्राइज मनी मिली।
2017 में शुरू हुआ पेगासस वर्ल्ड कप दुनिया में सबसे ज्यादा प्राइज मनी वाली हॉर्स रेस है। कुल प्राइज मनी 120 करोड़ रु. है। इसने प्राइज मनी के मामले में दुबई वर्ल्ड कप (85 करोड़ रुपए) को पीछे छोड़ा।
पेगासस में टर्फ और डर्ट ट्रैक होते हैं। दोनों पर अलग-अलग रेस होती हैं। दोनों में 12-12 एंट्री होती हैं। डर्ट रेस की प्राइज मनी 64 करोड़ और टर्फ की 50 करोड़ होती है। बाकी बोनस उस टीम को मिलता है, जो दोनों टर्फ पर चैंपियन बना हो।
गल्फस्ट्रीम पार्क रेस कोर्स के बाहर 110 फीट की पेगासस नाम के काल्पनिक घोड़े की मूर्ति लगी हुई है। इस रेस का नाम इसी के नाम पर रखा गया है।
प्रीमियर लीग: चेल्सी 0-4 से हारा, लिवरपूल का मैच ड्रॉ
इंग्लिश प्रीमियर लीग के मुकाबले में चेल्सी को बॉर्नमाउथ के हाथों 0-4 से हार का सामना करना पड़ा। बॉर्नमाउथ की तरफ से जोशुआ किंग ने दो, डेविड ब्रुक्स और चार्ली डेनियल्स ने 1-1 गोल किया। वहीं लिवरपूल और लीस्टर सिटी के बीच मैच 1-1 से ड्रॉ रहा। लिवरपूल के साडियो माने और लीस्टर के हैरी ने गोल किया।
भारतीय खिलाड़ियों में अंजुम दूसरे नंबर पर
भारतीय खिलाड़ियों में बात करें तो मिताली के बाद अंजुम चौपड़ा (1995-2012) हैं। इन्होंने भारत के लिए 127 मैच खेलकर 31.38 की औसत से 2856 रन बनाए हैं। अंजुम ने एक शतक लगाया है। इनके बाद हरमनप्रीत कौर तीसरे स्थान पर काबिज हैं। हरमनप्रीत ने अब तक 93 मैचों में 34.52 की औसत से 2244 रन बनाए। इसमें 3 शतक शामिल है।
अमेरिका के पेमब्रोक पाइन्स शहर की एक सड़क पर जिस गड्ढे को राहगीर आम टूट-फूट का नतीजा मान रहे थे, जांच में वह 150 फीट लंबी सुरंग निकली। अमेरिकी जांच एजेंसी एफबीआई के मुताबिक, चोरों ने सुरंग को बैंक के बेसमेंट के पास तक खोद लिया था। अब पुलिस इसकी तलाश कर रही है।
टर्फ और डर्ट पर अलग-अलग रेस
यह इस घोड़े के करिअर की आखिरी रेस थी। जेवियर और सिटी ऑफ लाइट पहली बार यहां चैंपियन बने। यह जेवियर के करिअर की 48वीं जीत है। विजेता को 21 करोड़ रुपए की प्राइज मनी मिली।
2017 में शुरू हुआ पेगासस वर्ल्ड कप दुनिया में सबसे ज्यादा प्राइज मनी वाली हॉर्स रेस है। कुल प्राइज मनी 120 करोड़ रु. है। इसने प्राइज मनी के मामले में दुबई वर्ल्ड कप (85 करोड़ रुपए) को पीछे छोड़ा।
पेगासस में टर्फ और डर्ट ट्रैक होते हैं। दोनों पर अलग-अलग रेस होती हैं। दोनों में 12-12 एंट्री होती हैं। डर्ट रेस की प्राइज मनी 64 करोड़ और टर्फ की 50 करोड़ होती है। बाकी बोनस उस टीम को मिलता है, जो दोनों टर्फ पर चैंपियन बना हो।
गल्फस्ट्रीम पार्क रेस कोर्स के बाहर 110 फीट की पेगासस नाम के काल्पनिक घोड़े की मूर्ति लगी हुई है। इस रेस का नाम इसी के नाम पर रखा गया है।
प्रीमियर लीग: चेल्सी 0-4 से हारा, लिवरपूल का मैच ड्रॉ
इंग्लिश प्रीमियर लीग के मुकाबले में चेल्सी को बॉर्नमाउथ के हाथों 0-4 से हार का सामना करना पड़ा। बॉर्नमाउथ की तरफ से जोशुआ किंग ने दो, डेविड ब्रुक्स और चार्ली डेनियल्स ने 1-1 गोल किया। वहीं लिवरपूल और लीस्टर सिटी के बीच मैच 1-1 से ड्रॉ रहा। लिवरपूल के साडियो माने और लीस्टर के हैरी ने गोल किया।
भारतीय खिलाड़ियों में अंजुम दूसरे नंबर पर
भारतीय खिलाड़ियों में बात करें तो मिताली के बाद अंजुम चौपड़ा (1995-2012) हैं। इन्होंने भारत के लिए 127 मैच खेलकर 31.38 की औसत से 2856 रन बनाए हैं। अंजुम ने एक शतक लगाया है। इनके बाद हरमनप्रीत कौर तीसरे स्थान पर काबिज हैं। हरमनप्रीत ने अब तक 93 मैचों में 34.52 की औसत से 2244 रन बनाए। इसमें 3 शतक शामिल है।
अमेरिका के पेमब्रोक पाइन्स शहर की एक सड़क पर जिस गड्ढे को राहगीर आम टूट-फूट का नतीजा मान रहे थे, जांच में वह 150 फीट लंबी सुरंग निकली। अमेरिकी जांच एजेंसी एफबीआई के मुताबिक, चोरों ने सुरंग को बैंक के बेसमेंट के पास तक खोद लिया था। अब पुलिस इसकी तलाश कर रही है।
Thursday, January 24, 2019
ICICI लोन केस: वेणुगोपाल धूत, दीपक कोचर के ठिकानों पर CBI रेड, FIR दर्ज
आईसीआईसीआई बैंक (ICICI) की पूर्व मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) चंदा कोचर के पति दीपक कोचर से जुड़े लोन केस में सीबीआई ने एफआईआर दर्ज कर ली है. इसके साथ ही सीबीआई ने मुंबई और औरंगाबाद में वीडियोकॉन के मुख्यालयों पर छापे भी मारे हैं. इस पूरे मामले में चंदा कोचर की भूमिका भी संदेह के दायरे में है.
सीबीआई ने यह एफआईआर वेणुगोपाल धूत के वीडियोकॉन ग्रुप और दीपक कोचर की कंपनी 'नूपावर' के खिलाफ की गई है. एफआईआर दर्ज करने के साथ सीबीआई की टीम ने कुल चार जगह छापेमारी की है. इनमें नरीमन प्वॉइंट स्थित वीडियोकॉन दफ्तर और नूपावर के कार्यालयों में सीबीआई की टीम ने पड़ताल की.
क्या है मामला?
ICICI बैंक और वीडियोकॉन के शेयर होल्डर अरविंद गुप्ता ने प्रधानमंत्री, रिजर्व बैंक और सेबी को एक खत लिखकर वीडियोकॉन के अध्यक्ष वेणुगोपाल धूत और ICICI की सीईओ व एमडी चंदा कोचर पर एक-दूसरे को लाभ पहुंचाने का आरोप लगाया था. दावा है कि धूत की कंपनी वीडियोकॉन को आईसीआईसीआई बैंक से 3250 करोड़ रुपये का लोन दिया गया और इसके बदले धूत ने चंदा कोचर के पति दीपक कोचर की वैकल्पिक ऊर्जा कंपनी 'नूपावर' में अपना पैसा निवेश किया.
आरोप है कि इस तरह चंदा कोचर ने अपने पति की कंपनी के लिए वेणुगोपाल धूत को लाभ पहुंचाया. साल 2018 में यह खुलासा होने के बाद चंदा कोचर को बैंक से इस्तीफा देना पड़ा था. सीबीआई ने पहले फरवरी, 2018 में इस मामले में प्रारंभिक जांच (पीई) दर्ज की थी. जिसके बाद अब जांच एजेंसी ने एफआईआर दर्ज कर तफ्तीश जारी कर दी है. वीडियोकॉन को लोन देने के मामले में चंदा कोचर की भूमिका पर भी सवाल हैं, ऐसे में एफआईआर दर्ज होने के बाद उनकी व परिवार की मुश्किलें बढ़ सकती हैं.
दरअसल, कपिल सिब्बल ने गुरुवार को ट्वीट किया, 'मोदीजी और अमित शाह ने कांग्रेस मुक्त भारत का आह्वान किया था. प्रियंका गांधी के अब पूर्वांचल की सियासत में आने से हम देखेंगे .... मुक्त वाराणसी? .... मुक्त गोरखपुर?' ये दोनों सीटें पूर्वांचल में आती हैं, जहां की जिम्मेदारी प्रियंका गांधी को सौंपी गई है. ऐसे में राजनीतिक कयास लगाए जा रहे हैं कि कांग्रेस को इस इलाके में पार्टी को मजबूत करने के लिए प्रियंका को वाराणसी सीट से नरेंद्र मोदी के खिलाफ चुनावी मैदान में उतार सकती है?
प्रियंका गांधी के लोकसभा चुनाव लड़ने पर बुधवार को राहुल गांधी ने कहा था कि ये फैसला पूरी तरह से प्रियंका पर ही निर्भर करेगा. हमारा बड़ा स्टेप लेने के पीछे मकसद यही है कि हम इस चुनाव में बैकफुट पर नहीं फ्रंटफुट पर लड़ेंगे. कांग्रेस पार्टी पूरे दमखम से ये चुनाव लड़ेगी. उन्होंने कहा कि मैं व्यक्तिगत तौर बहुत खुश हूं क्योंकि वह बहुत कर्मठ व सक्षम हैं और अब मेरे साथ काम करेंगी.
बता दें कि प्रियंका गांधी सक्रिय राजनीति में कदम रखने से पहले तक वो अमेठी और रायबरेली में ही चुनाव प्रचार तक ही अपने को सीमित रखती थीं. अमेठी से राहुल गांधी और रायबरेली से सोनिया गांधी सांसद है. अब सियासत में कदम रखने के बाद उन्हें पूर्वी उत्तर प्रदेश की जिम्मेदारी सौंपी गई हैं. ये इलाका बीजेपी का मजबूत दुर्ग माना जाता है. 2014 के लोकसभा चुनाव में नरेंद्र मोदी ने बनारस संसदीय सीट से उतरकर पूर्वांचल में सभी दलों का सफाया कर दिया था. महज आजमगढ़ सीट थी जिसे बीजेपी नहीं जीत सकी थी.
हालांकि, पूर्वांचल एक दौर में कांग्रेस का मजबूत इलाका होता था. इस इलाके से कांग्रेस को कई दिग्गज नेता रहे हैं. इंदिरा गांधी के दौर में कमलापति त्रिपाठी सूबे में कांग्रेस का चेहरा हुआ करते थे और वाराणसी सीट से 1980 में सांसद भी चुने गए थे. पूर्वांचल में उनकी तूती बोलती थी.
सीबीआई ने यह एफआईआर वेणुगोपाल धूत के वीडियोकॉन ग्रुप और दीपक कोचर की कंपनी 'नूपावर' के खिलाफ की गई है. एफआईआर दर्ज करने के साथ सीबीआई की टीम ने कुल चार जगह छापेमारी की है. इनमें नरीमन प्वॉइंट स्थित वीडियोकॉन दफ्तर और नूपावर के कार्यालयों में सीबीआई की टीम ने पड़ताल की.
क्या है मामला?
ICICI बैंक और वीडियोकॉन के शेयर होल्डर अरविंद गुप्ता ने प्रधानमंत्री, रिजर्व बैंक और सेबी को एक खत लिखकर वीडियोकॉन के अध्यक्ष वेणुगोपाल धूत और ICICI की सीईओ व एमडी चंदा कोचर पर एक-दूसरे को लाभ पहुंचाने का आरोप लगाया था. दावा है कि धूत की कंपनी वीडियोकॉन को आईसीआईसीआई बैंक से 3250 करोड़ रुपये का लोन दिया गया और इसके बदले धूत ने चंदा कोचर के पति दीपक कोचर की वैकल्पिक ऊर्जा कंपनी 'नूपावर' में अपना पैसा निवेश किया.
आरोप है कि इस तरह चंदा कोचर ने अपने पति की कंपनी के लिए वेणुगोपाल धूत को लाभ पहुंचाया. साल 2018 में यह खुलासा होने के बाद चंदा कोचर को बैंक से इस्तीफा देना पड़ा था. सीबीआई ने पहले फरवरी, 2018 में इस मामले में प्रारंभिक जांच (पीई) दर्ज की थी. जिसके बाद अब जांच एजेंसी ने एफआईआर दर्ज कर तफ्तीश जारी कर दी है. वीडियोकॉन को लोन देने के मामले में चंदा कोचर की भूमिका पर भी सवाल हैं, ऐसे में एफआईआर दर्ज होने के बाद उनकी व परिवार की मुश्किलें बढ़ सकती हैं.
दरअसल, कपिल सिब्बल ने गुरुवार को ट्वीट किया, 'मोदीजी और अमित शाह ने कांग्रेस मुक्त भारत का आह्वान किया था. प्रियंका गांधी के अब पूर्वांचल की सियासत में आने से हम देखेंगे .... मुक्त वाराणसी? .... मुक्त गोरखपुर?' ये दोनों सीटें पूर्वांचल में आती हैं, जहां की जिम्मेदारी प्रियंका गांधी को सौंपी गई है. ऐसे में राजनीतिक कयास लगाए जा रहे हैं कि कांग्रेस को इस इलाके में पार्टी को मजबूत करने के लिए प्रियंका को वाराणसी सीट से नरेंद्र मोदी के खिलाफ चुनावी मैदान में उतार सकती है?
प्रियंका गांधी के लोकसभा चुनाव लड़ने पर बुधवार को राहुल गांधी ने कहा था कि ये फैसला पूरी तरह से प्रियंका पर ही निर्भर करेगा. हमारा बड़ा स्टेप लेने के पीछे मकसद यही है कि हम इस चुनाव में बैकफुट पर नहीं फ्रंटफुट पर लड़ेंगे. कांग्रेस पार्टी पूरे दमखम से ये चुनाव लड़ेगी. उन्होंने कहा कि मैं व्यक्तिगत तौर बहुत खुश हूं क्योंकि वह बहुत कर्मठ व सक्षम हैं और अब मेरे साथ काम करेंगी.
बता दें कि प्रियंका गांधी सक्रिय राजनीति में कदम रखने से पहले तक वो अमेठी और रायबरेली में ही चुनाव प्रचार तक ही अपने को सीमित रखती थीं. अमेठी से राहुल गांधी और रायबरेली से सोनिया गांधी सांसद है. अब सियासत में कदम रखने के बाद उन्हें पूर्वी उत्तर प्रदेश की जिम्मेदारी सौंपी गई हैं. ये इलाका बीजेपी का मजबूत दुर्ग माना जाता है. 2014 के लोकसभा चुनाव में नरेंद्र मोदी ने बनारस संसदीय सीट से उतरकर पूर्वांचल में सभी दलों का सफाया कर दिया था. महज आजमगढ़ सीट थी जिसे बीजेपी नहीं जीत सकी थी.
हालांकि, पूर्वांचल एक दौर में कांग्रेस का मजबूत इलाका होता था. इस इलाके से कांग्रेस को कई दिग्गज नेता रहे हैं. इंदिरा गांधी के दौर में कमलापति त्रिपाठी सूबे में कांग्रेस का चेहरा हुआ करते थे और वाराणसी सीट से 1980 में सांसद भी चुने गए थे. पूर्वांचल में उनकी तूती बोलती थी.
Wednesday, January 16, 2019
बच्चा रोया तो मां के प्रेमी ने पीट-पीटकर कर मार डाला
दिल्ली के कापसहेड़ा इलाके में एक 5 साल का बच्चा रोया तो उसके मां के प्रेमी ने उसे पीट-पीटकर कर मार डाला. यह घटना उस वक्त हुई जब बच्चे की मां घर पर नहीं थी. इस पूरे घटनाक्रम को दबाने के लिए प्रेमी बच्चे को अस्पताल लेकर गया और कहा कि बच्चे कि हालत लड्डू खाने के वजह से बिगड़ गई है. लेकिन इस हत्याकांड का खुलासा तब हुआ जब पोस्टमार्टम की रिपोर्ट आई.
पुलिस के अनुसार, बच्चे के पिता 35 साल के सूर्य प्रताप सिंह इलाहबाद के रहने वाले हैं. उनकी 2012 में शादी रानी सिंह से हुई थी. इसके बाद 2013 को उन्हें बेटा युवान सिंह हुआ. रानी एक स्कूल में पढ़ाती थी, यहां पर काम करने वाले नरेंद्र से उसकी नजदीकियां बढ़ गईं. इन कारण पति-पत्नी के रिश्ते में दरार आ गई.
दोनों के बीच झगड़े होने लगे. फिर रानी अपने बेटे युवान को लेकर प्रेमी नरेंद्र के साथ रहने लगी. इस बीच रानी नौकरी की तलाश में इंटरव्यू देने बाहर जाने लगी. घर पर युवान नरेंद्र के साथ अकेला रहता था. वो उसे पढ़ाता भी था. फिर कल अचानक पढ़ाई करते समय गलती होने पर नरेंद्र भड़क उठा. उसने 5 साल के युवान को पटक-पटककर मार डाला.
फिर अपनी गलती छिपाने के लिए वह उसे अस्पताल लेकर गया. उसने रानी को फोन करके कहा कि युवान ने लड्डू खाए थे. इस वजह से उसकी तबियत खराब हो गई. इस बीच युवान ने दम तोड़ दिया.
पोस्टमार्टम से हुआ खुलासा...
जब युवान का पोस्टमार्टम हुआ तो डॉक्टर हैरान रह गए. उन्होंने देखा कि युवान की मौत लड्डू खाने से नहीं हुई है. बल्कि उसे बेरहमी से पीटा गया. इसके बाद डॉक्टर्स ने पुलिस को इसकी जानकारी दी.
पुलिस ने नरेंद्र को हिरासत में लिया तो उसने युवान को पीटने की बात बताई. महिला को भी पुलिस ने गिरफ्तार किया है. हालांकि, उसने हत्या में शामिल होने की बात से इनकार किया है. दोनों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच की जा रही है.
सपा अपने कोटे से आरएलडी को दो सीटें दे सकती है, लेकिन वो सीधे तौर पर नहीं होंगी. वो सीटें ऐसी होंगी, जहां आरएलडी उम्मीदवार सपा के चुनाव चिन्ह पर चुनावी मैदान में उतरना पड़ेगा. सूत्रों की मानें तो इसके लिए आरएलडी को पहले ही इस फॉर्मूले को बता दिया गया है. अखिलेश यादव और जयंत की पहले हुए बैठक में ही इस बात की जानकारी दे दी गई थी कि दो सीटें आरएलडी अपने चुनाव चिन्ह पर लड़े और दो सीटें कैराना मॉडल के तहत.
दिलचस्प बात ये है कि आरएलडी अपने सियासी सफर में सबसे संकट के दौर से गुजर रही है. मौजूदा दौर में उसके पार्टी के एक विधायक है जो राज्यसभा चुनाव में बीजेपी से जुड़ गए हैं. इसके अलावा 2014 के लोकसभा चुनाव में अजित चौधरी और जयंत चौधरी भी जीत नहीं सके थे. बता दें कैराना उपचुनाव में सपा बसपा के समर्थन से आरएलडी उम्मीदवार ने जीत हासिल कर पार्टी का खाता खोला था. हालांकि, ये सपा के उम्मीदवार थे, जिन्हें आरएलडी के चुनाव चिन्ह पर चुनाव लड़ा था.
पुलिस के अनुसार, बच्चे के पिता 35 साल के सूर्य प्रताप सिंह इलाहबाद के रहने वाले हैं. उनकी 2012 में शादी रानी सिंह से हुई थी. इसके बाद 2013 को उन्हें बेटा युवान सिंह हुआ. रानी एक स्कूल में पढ़ाती थी, यहां पर काम करने वाले नरेंद्र से उसकी नजदीकियां बढ़ गईं. इन कारण पति-पत्नी के रिश्ते में दरार आ गई.
दोनों के बीच झगड़े होने लगे. फिर रानी अपने बेटे युवान को लेकर प्रेमी नरेंद्र के साथ रहने लगी. इस बीच रानी नौकरी की तलाश में इंटरव्यू देने बाहर जाने लगी. घर पर युवान नरेंद्र के साथ अकेला रहता था. वो उसे पढ़ाता भी था. फिर कल अचानक पढ़ाई करते समय गलती होने पर नरेंद्र भड़क उठा. उसने 5 साल के युवान को पटक-पटककर मार डाला.
फिर अपनी गलती छिपाने के लिए वह उसे अस्पताल लेकर गया. उसने रानी को फोन करके कहा कि युवान ने लड्डू खाए थे. इस वजह से उसकी तबियत खराब हो गई. इस बीच युवान ने दम तोड़ दिया.
पोस्टमार्टम से हुआ खुलासा...
जब युवान का पोस्टमार्टम हुआ तो डॉक्टर हैरान रह गए. उन्होंने देखा कि युवान की मौत लड्डू खाने से नहीं हुई है. बल्कि उसे बेरहमी से पीटा गया. इसके बाद डॉक्टर्स ने पुलिस को इसकी जानकारी दी.
पुलिस ने नरेंद्र को हिरासत में लिया तो उसने युवान को पीटने की बात बताई. महिला को भी पुलिस ने गिरफ्तार किया है. हालांकि, उसने हत्या में शामिल होने की बात से इनकार किया है. दोनों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच की जा रही है.
सपा अपने कोटे से आरएलडी को दो सीटें दे सकती है, लेकिन वो सीधे तौर पर नहीं होंगी. वो सीटें ऐसी होंगी, जहां आरएलडी उम्मीदवार सपा के चुनाव चिन्ह पर चुनावी मैदान में उतरना पड़ेगा. सूत्रों की मानें तो इसके लिए आरएलडी को पहले ही इस फॉर्मूले को बता दिया गया है. अखिलेश यादव और जयंत की पहले हुए बैठक में ही इस बात की जानकारी दे दी गई थी कि दो सीटें आरएलडी अपने चुनाव चिन्ह पर लड़े और दो सीटें कैराना मॉडल के तहत.
दिलचस्प बात ये है कि आरएलडी अपने सियासी सफर में सबसे संकट के दौर से गुजर रही है. मौजूदा दौर में उसके पार्टी के एक विधायक है जो राज्यसभा चुनाव में बीजेपी से जुड़ गए हैं. इसके अलावा 2014 के लोकसभा चुनाव में अजित चौधरी और जयंत चौधरी भी जीत नहीं सके थे. बता दें कैराना उपचुनाव में सपा बसपा के समर्थन से आरएलडी उम्मीदवार ने जीत हासिल कर पार्टी का खाता खोला था. हालांकि, ये सपा के उम्मीदवार थे, जिन्हें आरएलडी के चुनाव चिन्ह पर चुनाव लड़ा था.
Monday, January 14, 2019
कल मकर संक्रांति पर पहला शाही स्नान; निरंजनी अखाड़े की महामंडलेश्वर बनीं केंद्रीय मंत्री ज्योति
कुंभ में कल यानी मंगलवार को तड़के से ही पहले शाही स्नान का सिलसिला शुरू हो जाएगा। प्रशासन ने एक दिन पहले ही घाटों को तैयार कर लिया है। सोमवार को मेला क्षेत्र में यातायात पर प्रतिबंध लगा दिया गया। पुलिस-प्रशासन व्यवस्थाओं पर ड्रोन के जरिए नजर रखेगी। वहीं, स्नान पर्व को देखते हुए प्रयागराज में 14 जनवरी से 16 जनवरी तक (3 दिन) सभी 12वीं तक स्कूल और कॉलेजों बंद रखे जाएंगे। जिलाधिकारी ने कॉलेजों को इस संबंध में एडवाइजरी जारी की है। इससे पहले सोमवार को केंद्रीय मंत्री साध्वी निरंजन ज्योति को निरंजनी पंचायती अखाड़े की महामंडलेश्वर की पदवी दी गई। यह पहला मौका होगा, जब किसी केंद्रीय मंत्री को अखाड़े की ओर से महामंडलेश्वर बनाया गया। कुंभ मेले में साधु संतों को महामंडलेश्वर, महंत, श्रीमहंत बनाए जाने की परंपरा रही है। अखाड़े कुंभ में नागा साधु भी बनाते हैं।
दुनिया का सबसे बड़ा धार्मिक और आध्यात्मिक मेला प्रयागराज कुंभ मंगलवार को मकर संक्रांति के साथ शुरू हो रहा है। यह 15 जनवरी से 4 मार्च तक कुल 49 दिन चलेगा। इस बार इसमें करीब 13 से 15 करोड़ लोगों के आने की उम्मीद है। इसमें करीब 10 लाख विदेशी नागरिक शामिल होंगे। उत्तरप्रदेश सरकार कुंभ 2019 को अब तक का सबसे भव्य कुंभ बता रही है।
सरकार के मुताबिक, पहली बार मेला क्षेत्र करीब 45 वर्ग किमी के दायरे में फैला है। पहले यह सिर्फ 20 वर्ग किमी इलाके में ही हाेता था। मेले में 50 करोड़ की लागत से 4 टेंट सिटी बसाई गई हैं, जिनके नाम कल्प वृक्ष, कुंभ कैनवास, वैदिक टेंट सिटी, इन्द्रप्रस्थम सिटी हैं। कुंभ के दौरान प्रयागराज में दुनिया का सबसे बड़ा अस्थायी शहर बस जाता है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक कुंभ के आयोजन पर 4300 करोड़ रुपए खर्च हो रहे हैं। इस बार कुंभ की थीम- स्वच्छ कुंभ और सुरक्षित कुंभ है। सरकार ने 10 करोड़ लोगों के मोबाइल पर मैसेज भेजकर उन्हें कुंभ में आने का निमंत्रण भी दिया है।
कुंभ क्षेत्र में सोमवार दोपहर दिगंबर अखाड़े में दो एलपीजी सिलेंडरों में ब्लास्ट होने से आग लग गई। सूचना पाकर मौके पर दमकल की तीन गाड़ियां पहुंचीं। घटना में रसोई का टेंट जल गया। आग से 9 तंबू प्रभावित हुए हैं। किसी के हताहत होने की खबर नहीं है। घटना के बाद अखाड़े में मौजूद साधु-संतों को बाहर निकाला गया। डीएम ने अग्निकांड की जांच के आदेश दिए हैं। पुलिस ने बताया कि टेंट में खाना बनाते वक्त गैस रिसाव होने से ब्लास्ट होना सामने आया है। पुलिस और दमकल विभाग ने आग पर काबू पा लिया।
भारत में 4 जगहों पर कुंभ होता है। इनके नाम- प्रयागराज, हरिद्वार, उज्जैन और नासिक हैं। इनमें से हर स्थान पर 12वें साल कुंभ होता है। प्रयाग में दो कुंभ पर्वों के बीच 6 साल के अंतराल में अर्धकुंभ भी होता है। प्रयागराज में पिछला कुंभ 2013 में हुआ था। 2019 में यह अर्द्धकुंभ है। हालांकि यूपी सरकार इसे कुंभ बता रही है। प्रयागराज में पूर्ण कुंभ 2025 में होगा।
कब आता है कुंभ
प्रयागराज कुंभ मेला मकर संक्रांति के दिन शुरू होता है, जब सूर्य और चंद्रमा वृश्चिक राशि में और बृहस्पति मेष राशि में प्रवेश करते हैं।
मान्यता : कुंभ का मतलब कलश होता है। इसका संबंध समुद्र मंथन के दौरान अंत में निकले अमृत कलश से है। मान्यता है कि देवता-असुर जब अमृत कलश को एक दूसरे से छीन रहे थे, तब उसकी कुछ बूंदें धरती की तीन नदियों में गिरी थीं। जहां ये बूंदें गिरीं, वहीं पर कुंभ होता है। इन नदियों के नाम- गंगा, गोदावरी और क्षिप्रा हैं।
शाही स्नान : 15, 21 जनवरी, 4,10,19 फरवरी, 4 मार्च
इतिहास : प्रयाग कुंभ का लिखित इतिहास में जिक्र गुप्तकाल में (चौथी से छठी सदी) मिलता है। चीनी यात्री ह्वेनसांग ने किताब में कुंभ का जिक्र किया। वह 617 से 647 ईसवीं तक भारत में रहे थे। लिखा है कि प्रयाग में राजा हर्षवर्धन ने अपना सब कुछ दान कर राजधानी लौट जाते हैं।
मेले के आयोजन में राज्य सरकार की 20 और केंद्र सरकार की 6 संस्थाएं और विभाग लगे हैं। मेला क्षेत्र में पीने के पानी के लिए 690 किमी लंबी पाइपलाइन बिछाई गई है। साथ ही 800 किमी लंबाई में बिजली की सप्लाई पहुंचाई गई है।
25 हजार स्ट्रीट लाइट लगाई गई हैं। 7 हजार स्वच्छता कर्मी और 20 हजार पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं। 4 पुलिस लाइन समेत 40 पुलिस थाना, 3 महिला थाना, 62 पुलिस पोस्ट बनाई गई हैं।
पहली बार कुंभ में 2 इंटीग्रेटेड कंट्रोल कमांड एंड सेंटर बनाए गए हैं। यह मेला क्षेत्र में आने वाली भीड़ और ट्रैफिक को नियंत्रित करने और सुरक्षित बनाने का काम करेगा। एक सेंटर पर करीब 116 करोड़ रुपए का खर्च आ रहा है।
पहली बार में ऑर्टीफिशियल इंटेलिजेंस का भी इस्तेमाल हो रहा है, यह भीड़ का मैनेजमेंट करेगी। श्रद्धालुओं के लिए वर्चुअल रियलिटी(वीआर) सेवा उपलब्ध कराने के लिए 10 स्टाॅल बनाए गए हैं।
दुनिया का सबसे बड़ा धार्मिक और आध्यात्मिक मेला प्रयागराज कुंभ मंगलवार को मकर संक्रांति के साथ शुरू हो रहा है। यह 15 जनवरी से 4 मार्च तक कुल 49 दिन चलेगा। इस बार इसमें करीब 13 से 15 करोड़ लोगों के आने की उम्मीद है। इसमें करीब 10 लाख विदेशी नागरिक शामिल होंगे। उत्तरप्रदेश सरकार कुंभ 2019 को अब तक का सबसे भव्य कुंभ बता रही है।
सरकार के मुताबिक, पहली बार मेला क्षेत्र करीब 45 वर्ग किमी के दायरे में फैला है। पहले यह सिर्फ 20 वर्ग किमी इलाके में ही हाेता था। मेले में 50 करोड़ की लागत से 4 टेंट सिटी बसाई गई हैं, जिनके नाम कल्प वृक्ष, कुंभ कैनवास, वैदिक टेंट सिटी, इन्द्रप्रस्थम सिटी हैं। कुंभ के दौरान प्रयागराज में दुनिया का सबसे बड़ा अस्थायी शहर बस जाता है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक कुंभ के आयोजन पर 4300 करोड़ रुपए खर्च हो रहे हैं। इस बार कुंभ की थीम- स्वच्छ कुंभ और सुरक्षित कुंभ है। सरकार ने 10 करोड़ लोगों के मोबाइल पर मैसेज भेजकर उन्हें कुंभ में आने का निमंत्रण भी दिया है।
कुंभ क्षेत्र में सोमवार दोपहर दिगंबर अखाड़े में दो एलपीजी सिलेंडरों में ब्लास्ट होने से आग लग गई। सूचना पाकर मौके पर दमकल की तीन गाड़ियां पहुंचीं। घटना में रसोई का टेंट जल गया। आग से 9 तंबू प्रभावित हुए हैं। किसी के हताहत होने की खबर नहीं है। घटना के बाद अखाड़े में मौजूद साधु-संतों को बाहर निकाला गया। डीएम ने अग्निकांड की जांच के आदेश दिए हैं। पुलिस ने बताया कि टेंट में खाना बनाते वक्त गैस रिसाव होने से ब्लास्ट होना सामने आया है। पुलिस और दमकल विभाग ने आग पर काबू पा लिया।
भारत में 4 जगहों पर कुंभ होता है। इनके नाम- प्रयागराज, हरिद्वार, उज्जैन और नासिक हैं। इनमें से हर स्थान पर 12वें साल कुंभ होता है। प्रयाग में दो कुंभ पर्वों के बीच 6 साल के अंतराल में अर्धकुंभ भी होता है। प्रयागराज में पिछला कुंभ 2013 में हुआ था। 2019 में यह अर्द्धकुंभ है। हालांकि यूपी सरकार इसे कुंभ बता रही है। प्रयागराज में पूर्ण कुंभ 2025 में होगा।
कब आता है कुंभ
प्रयागराज कुंभ मेला मकर संक्रांति के दिन शुरू होता है, जब सूर्य और चंद्रमा वृश्चिक राशि में और बृहस्पति मेष राशि में प्रवेश करते हैं।
मान्यता : कुंभ का मतलब कलश होता है। इसका संबंध समुद्र मंथन के दौरान अंत में निकले अमृत कलश से है। मान्यता है कि देवता-असुर जब अमृत कलश को एक दूसरे से छीन रहे थे, तब उसकी कुछ बूंदें धरती की तीन नदियों में गिरी थीं। जहां ये बूंदें गिरीं, वहीं पर कुंभ होता है। इन नदियों के नाम- गंगा, गोदावरी और क्षिप्रा हैं।
शाही स्नान : 15, 21 जनवरी, 4,10,19 फरवरी, 4 मार्च
इतिहास : प्रयाग कुंभ का लिखित इतिहास में जिक्र गुप्तकाल में (चौथी से छठी सदी) मिलता है। चीनी यात्री ह्वेनसांग ने किताब में कुंभ का जिक्र किया। वह 617 से 647 ईसवीं तक भारत में रहे थे। लिखा है कि प्रयाग में राजा हर्षवर्धन ने अपना सब कुछ दान कर राजधानी लौट जाते हैं।
मेले के आयोजन में राज्य सरकार की 20 और केंद्र सरकार की 6 संस्थाएं और विभाग लगे हैं। मेला क्षेत्र में पीने के पानी के लिए 690 किमी लंबी पाइपलाइन बिछाई गई है। साथ ही 800 किमी लंबाई में बिजली की सप्लाई पहुंचाई गई है।
25 हजार स्ट्रीट लाइट लगाई गई हैं। 7 हजार स्वच्छता कर्मी और 20 हजार पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं। 4 पुलिस लाइन समेत 40 पुलिस थाना, 3 महिला थाना, 62 पुलिस पोस्ट बनाई गई हैं।
पहली बार कुंभ में 2 इंटीग्रेटेड कंट्रोल कमांड एंड सेंटर बनाए गए हैं। यह मेला क्षेत्र में आने वाली भीड़ और ट्रैफिक को नियंत्रित करने और सुरक्षित बनाने का काम करेगा। एक सेंटर पर करीब 116 करोड़ रुपए का खर्च आ रहा है।
पहली बार में ऑर्टीफिशियल इंटेलिजेंस का भी इस्तेमाल हो रहा है, यह भीड़ का मैनेजमेंट करेगी। श्रद्धालुओं के लिए वर्चुअल रियलिटी(वीआर) सेवा उपलब्ध कराने के लिए 10 स्टाॅल बनाए गए हैं।
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